Sunday, November 25, 2018

संघ प्रमुख बोले, धैर्य बहुत हुआ, अब मंदिर के लिए क़ानून लाए सरकार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि धैर्य का समय अब ख़त्म हो चुका है और अगर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मामला उच्चतम न्यायालय की प्राथमिकता में नहीं है तो सरकार को इसके लिए क़ानून लाना चाहिए.

नागपुर में रविवार शाम को 'हुंकार सभा' में भागवत ने कहा, "मामला अदालत में है और निर्णय जल्दी ही दिया जाना चाहिए. एक साल पहले मैंने ही कहा था कि धैर्य रखें. अब मैं ही कह रहा हूँ कि धैर्य से काम नहीं होगा. हमें लोगों को एकजुट करने की ज़रूरत है.''

उन्होंने कहा, ''हम कह रहे हैं सरकार क़ानून बनाएं. जिनको बनाना है वे सोचें कि ये कैसे बना सकते हैं. जल्‍दी से जल्‍दी क़ानून बनना चाहिए. श्रीराम जन्म भूमि पर भव्य मंदिर का औचित्य सिद्ध हो चुका है.''

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का कोई जज जब अयोध्या जैसे गंभीर मुद्दे पर न्याय दिलाने की दिशा में आगे बढ़ता है तो कांग्रेस जजों के ख़िलाफ़ महाभियोग लाकर उन्हें डराती-धमकाती है.

मोदी ने कहा कि जब अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी तब कांग्रेस के एक नेता और राज्यसभा सदस्य ने कहा कि 2019 तक केस मत चलाओ क्योंकि 2019 में चुनाव हैं. देश के न्यायतंत्र को इस प्रकार राजनीति में घसीटना उचित है क्या?

सेंटिनल आदिवासियों ने पुलिस को लौटाया
अंडमान द्वीप पर सेंटिनल जनजाति के हाथों मारे गए अमरीकी धर्म प्रचारक का शव अभी भी नहीं मिल पाया है. पुलिस ने बताया कि रविवार को अधिकारियों ने शव तलाशने की फिर से कोशिश की लेकिन उनका सामना जनजाति के लोगों से हुआ. पुलिस टीम नाव के ज़रिए शनिवार को उत्‍तरी सेंटीनल द्वीप गई लेकिन उन्‍हें तट पर आदिवासी समुदाय के लोग नज़र आए.

क्षेत्र के पुलिस प्रमुख दीपेंद्र पाठक ने बताया कि अधिकारियों ने दूरबीन की सहायता से देखा कि तीर-धनुष लिए हुए लोग वहां घूम रहे थे. आदिवासियों ने तीर के ज़रिए ही अमरीकी नागरिक जॉन एलन चाऊ की ह‍त्‍या की थी.

पाठक के मुताबिक़ समुद्री किनारे से 400 मीटर अंदर समुद्र में अपनी नाव में बैठे पुलिस के जवानों ने दूरबीन से देखा तो आदिवासी तीर-धनुष के साथ तैनात थे. टकराव की स्थिति देखते हुए टीम लौट आई.

काले धन की जानकारी नहीं देंगे: पीएमओ

सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय ने साल 2014 से अब तक विदेश से भारत में आए काले धन की जानकारी देने से इनकार कर दिया है.

व्हिसिलब्लोअर नौकरशाह संजीव चतुर्वेदी ने जब पीएमओ से यह सवाल पूछा तो उन्होंने ये जानकारी देने से इनकार कर दिया गया. पीएमओ ने आरटीआई धारा 8 (1) (एच) का हवाला दिया. आरटीआई अधिनियम की ये धारा जाँच और अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मुक़दमों के बाधित होने की आशंका में सूचनाओं की जानकारी देने पर रोक की मंज़ूरी देता है.

केन्द्रीय सूचना आयोग यानी सीआईसी ने 16 अक्तूबर को एक आदेश में पीएमओ को 15 दिनों के भीतर काले धन का ब्यौरा मुहैया कराने के लिए कहा गया था.

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